अमीरों ने एक साल में दिया 5,896 करोड़ का इलेक्टोरल बॉन्ड:प्रेस रिव्यू

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार राजनीतिक पार्टियों को इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए सबसे ज़्यादा चंदा बेहद अमीर तबके से आया है.
एक आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार पार्टियों को मिले चंदे में 91% से भी ज़्यादा इलेक्टोरल बॉन्ड एक करोड़ रुपये के थे. इन बॉन्ड्स की क़ीमत 5,896 करोड़ रुपये थी.
आरटीआई एक्टिविस्ट लोकेश बत्रा को मिली जानकारी के मुताबिक़, 1 मार्च 2018 से लेकर 24 जुलाई 2019 के बीच राजनीतिक पार्टियों को जो चंदा मिला उसमें,
किसी भी राजनीतिक दल को मिलने वाले चंदे इलेक्टोरल बॉन्ड कहा जाता है. ये एक तरह का नोट ही है जो एक हज़ार, 10 हज़ार, एक लाख, 10 लाख और एक करोड़ तक आता है. कोई भी भारतीय नागरिक इसे स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया से खरीद सकता है और राजनी
दान देने वालों की पहचान गुप्त रखी जाती है और उसे आयकर रिटर्न भरते वक़्त भी इस बारे में कोई जानकारी नहीं देनी होती.
पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किए थे जिनके ज़रिए उद्योग और कारोबारी और आम लोग अपनी पहचान बताए बिना चंदा दे सकते हैं.
रिपोर्ट्स के अनुसार पिछले एक साल में इलेक्टोरल बॉन्डस के जरिए सबसे ज़्यादा चंदा बीजेपी को मिला है.
इलेक्टोरल बॉन्ड्स में पारदर्शिता की कमी को लेकर चुनाव आयोग लगातार सवाल उठाता आया है.
इसी साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में इलेक्टोरल बॉन्ड पर तत्काल रोक लगाए बगैर सभी पार्टियों से अपने चुनावी फ़ंड की पूरी जानकारी देने को कहा था.
तिक पार्टी को चंदा दे सकता है.
इलेक्टोरल बॉन्ड 15 दिनों के लिए वैध रहते हैं केवल उस अवधि के दौरान ही अपनी पार्टी के अधिकृत बैंक ख़ाते में ट्रांसफर किया जा सकता है. इसके बाद पार्टी उस बॉन्ड को कैश करा सकती है.
एक करोड़ और 10 लाख के इलेक्टोरल बॉन्ड्स का लगभग 99.7 हिस्सा था.
इस दौरान दिए गए सभी इलेक्टोरल बॉन्ड्स
इतना ही नहीं, इलेक्ट्रोरल बॉन्ड के जरिए मिले चंदे का 83% हिस्सा सिर्फ़ चार शहरों से आया. ये चार शहर हैं: मुंबई, कोलकाता, नई दिल्ली और हैदराबाद. इन चारों शहरों से मिलने वाले बॉन्ड की क़ीमत 5,085 करोड़ रुपये थी.
अख़बार लिखता है कि इन बॉन्ड्स का लगभग 80 फ़ीसदी हिस्सा दिल्ली में कैश कराया गया.
भारतीय सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से कहा है कि उसे अनुच्छेद-370 ख़त्म किए जाने के बाद वहां लगी पाबंदियों से जुड़े सभी सवालों के जवाब देने होंगे.
इंडियन एक्सप्रेस में छपी रिपोर्ट के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली बेंच ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन की तरफ़ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि उन्हें पाबंदियों से जुड़े हरेक सवाल के जवाब दिया जाए ताकि बाहर ये संदेश न जाए कि सरकार इस बारे में गंभीर नहीं थी.
इस पर तुषार मेहता ने अदालत से कहा कि जम्मू-कश्मीर में हालात दिन पर दिन सुधर रहे हैं.
उन्होंने ये भी कहा कि 5 अगस्त से लगी पाबंदियों के बाद एक भी शख़्स की मौत नहीं हुई और अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद कश्मीर के लोगों के इतने अधिकार मिले हैं, जितने पिछले 70 वर्षों में कभी नहीं मिले.
वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि उस वक़्त की स्थिति को देखते हुए अगर कुछ पाबंदियां न लगाई जातीं तो यह मूर्खतापूर्ण होता.
उन्होंने अदालत से कहा, "आप ये मत देखिए कि यहां-वहां क्या लिखा जा रहा है...आप पूरी तस्वीर देखिए."
की क़ीमत 6,128.72 करोड़ रुपये थी.
इसके उलट एक हज़ार, 10 हज़ार और एक लाख के बॉन्ड्स से पार्टियों को सिर्फ़ 15.06 करोड़ के बराबर चंदा मिला.

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