कश्मीर पर इमरान ख़ान ने ग़लतियां की'

सीआईए ने अपने अभियानों के लिए बहुत से जानवरों का इस्तेमाल किया. उसने पाया कि इन सभी में कबूतर सबसे ज़्यादा प्रभावी जीव है.
इसी वजह से 1970 के मध्य में सीआईए ने कबूतरों से जुड़ी एक सिरीज़ शुरू कर दी. कबूतरों को दूसरे अभियानों मे भी इस्तेमाल किया जाने लगा. जैसे, एक कबूतर को जेल के ऊपर तैनात कर दिया तो दूसरे को वॉशिंगटन डीसी में नौसेना के बाड़े में.
इन अभियानों में इस्तेमाल होने वाले कैमरों की कीमत दो हज़ार डॉलर तक आती थी जिसका वज़न सिर्फ़ 35 ग्राम होता था, वहीं कबूतर से बांधने के लिए जिस चीज़ का प्रयोग होता था उसका वज़न तो 5 ग्राम से भी कम था.
टेस्ट में पता चला है कि कबूतरों ने नौसेना के बाड़े से 140 तस्वीरें प्राप्त की, जिसमें से आधी तस्वीरें अच्छी क्वालिटी की थीं. इन तस्वीरों में गाड़ियां और इंसान बहुत साफ देखे जा सकते थे.
विशेषज्ञों ने यह भी पाया कि उसी दौरान जो तस्वीरें खुफ़िया सैटेलाइट ने मुहैया करवाई थीं उनकी क्वालिटी इनके सामने बहुत अच्छी नहीं थी.
हालांकि, कबूतरों के इस्तेमाल में एक डर यह था कि अगर किसी शख्स को उस पर शक़ हो जाए और वह उसे मार दे तो पूरे अभियान में गड़बड़ी आ सकती थी.
कबूतरों को सोवियत संघ में छोड़ने के लिए बहुत गुप्त तरीके अपनाए जाते थे. उन्हें जहाज़ के रास्ते छिपाकर मॉस्को लाया जाता. उसके बाद उन कबूतरों को किसी कोट के नीचे दबाकर, या किसी कार की छत में छेद कर बाहर छोड़ा जाता था.
इसके अलावा चलती हुई गाड़ी की खिड़की से भी कबूतरों को छोड़ने की कोशिश की जाती. कबूतर इसके बाद अपने टारगेट के करीब जाता और वहां काम पूरा होने के बाद ट्रेनिंग के अनुसार अपने घर की ओर लौट आता.
सितंबर 1976 के एक मेमो के अनुसार लेनिनग्राद में एक समुद्री जहाज़ के बेड़े को निशाना बनाया गया था, यहां सबसे आधुनिक सोवियत पनडुब्बियां तैयार होती थीं.
इन जासूस कबूतरों ने सीआईए को कितनी खुफ़िया जानकारियां दीं और इससे सीआईए को क्या-क्या फायदा हुआ, यह अब भी रहस्य ही बना हुआ है.
इमरान ख़ान पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बनने के बाद से कई चुनौतियों से जूझ रहे हैं. आर्थिक मोर्चे पर पाकिस्तान किसी तरह डिफॉल्टर होते-होते बचा है लेकिन अब भी संकट के बादल पूरी तरह से छँटे नहीं हैं.
दूसरी ओर भारत के साथ हाल के दिनों में कश्मी
पाकिस्तानी पीएम ने कहा कि भारत के साथ युद्ध संभव है. अपने पड़ोसी देशों में पाकिस्तान का चीन के साथ संबंध ऐतिहासिक रूप से काफ़ी क़रीबी का है लेकिन भारत के साथ बिल्कुल निचले स्तर पर.
इमरान ख़ान ने कश्मीर को लेकर इस इंटरव्यू में कहा, ''कश्मीर में 80 लाख मुस्लिम पिछले 6 हफ़्तों से क़ैद हैं. भारत पाकिस्तान पर आतंकवाद फैलाने का आरोप लगा दुनिया का ध्यान इस मुद्दे से भटकाना चाहता है. पाकिस्तान कभी युद्ध की शुरुआत नहीं करेगा. इसे लेकर मैं बिल्कुल स्पष्ट हूं. मैं अमनपंसद इंसान हूं. मैं युद्ध विरोधी हूं. मेरा मानना है कि युद्ध किसी समस्या का समाधान नहीं है.''
इमरान ख़ान ने कहा, ''जब दो परमाणु शक्ति संपन्न देश टकराएंगे इसके नतीजे की कल्पना नहीं कर सकते. इसीलिए हमने संयुक्त राष्ट्र से संपर्क किया. हम दुनिया के तमाम अहम मंचों पर इस मुद्दे को उठा रहे हैं. हम इसका राजनीतिक समाधान चाहते हैं. अगर मामला युद्ध में गया तो यह भारतीय उपमहाद्वीप तक ही सीमित नहीं रहेगा. यह इससे आगे जाएगा और पूरी दुनिया प्रभावित होगी. ''
इमरान ख़ान ने कहा, ''हमने भारत से संवाद की कोशिश की लेकिन भारत ने हमें फ़ाइनैंशियल एक्शन टास्क फ़ोर्स की ब्लैक लिस्ट में डलवाने की कोशिश की. अगर पाकिस्तान ब्लैकलिस्ट में चला जाता तो हमारे ऊपर कई प्रतिबंध लग जाते. भारत हमें दिवालिया घोषित करवाना चाहता है.''
उन्होंने कहा, "भारत सरकार ने अपने ही संविधान के अनुच्छेद 370 को ख़त्म कर दिया है, इसके बाद तो फ़िलहाल उससे बात करने का कोई सवाल नहीं है. उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के उस प्रस्ताव के ख़िलाफ़ जाकर ग़ैरक़ानूनी तरीक़े से कश्मीर को मिला लिया है जिसमें जनमतसंग्रह की गारंटी दी गई थी. इस तरह उन्होंने केवल अंतरराष्ट्रीय क़ानून ही नहीं तोड़ा बल्कि अपने संविधान का भी उल्लंघन किया है."
वहीं भारत ने साफ़ कर दिया है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और वो इसमें किसी का हस्तक्षेप स्वीकार नहीं करेगा.
जब इमरान ख़ान से उनके एक साल के कार्यकाल की उपलब्धियों के बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था, "हम पहले ही एक नए पाकिस्तान में हैं...इस सरकार ने ऐसी चीज़ें की हैं जिन्हें पहले की किसी सरकार ने नहीं किए. लेकिन जैसी कहावत है रोम एक दिन में नहीं बना. जब आप इस तरह के बड़े बदलाव और सुधार करने की शुरुआत करते हैं तो इसमें वक़्त लगता है. किसी भी सरकार के कामकाज़ का आकलन पाँच साल बाद ही हो पाता है....पहला साल सबसे मुश्किल समय था लेकिन अबसे लोगों को फ़र्क़ पता चलना शुरू हो जाएगा...इस समय देश की दिशा सही है."
र को लेकर तनाव चरम है तो देश के भीतर भी कराची पर राजनीति गर्म है.
भारत ने जम्मू-कश्मीर की स्वायत्तता ख़त्म की तो पाकिस्तान ने इस मुद्दे को दुनिया के हर मंच पर उठाया लेकिन उस तरह से कामयाबी नहीं मिली.
इमरान ख़ान को पाकिस्तान में उनके विरोधी यू-टर्न पीएम कहते हैं. इमरान ख़ान ने नया पाकिस्तान बनाने का वादा किया था लेकिन अभी तक ज़मीन पर कोई ठोस बदलाव नज़र नहीं आ रहा है.
इमरान ख़ान ने अल जज़ीरा को दिए इंटरव्यू में कहा है कि भारत के साथ कश्मीर पर युद्ध संभव है. क्या दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच कोई बड़े संघर्ष या जंग का ख़तरा है? इस सवाल के जवाब में इमरान ख़ान ने कहा कि हां, दोनों देशों के बीच युद्ध का ख़तरा है.

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